International Research journal of Management Science and Technology
ISSN 2250 - 1959 (online) ISSN 2348 - 9367 (Print) New DOI : 10.32804/IRJMST
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उपनिषदों में प्रणव का स्वरूप
1 Author(s): SEEMA BANSAL
Vol - 5, Issue- 5 , Page(s) : 120 - 126 (2014 ) DOI : https://doi.org/10.32804/IRJMST
प्र+आ उपसर्गपूर्वक नम् धातु से णिजन्त प्रत्यय द्वारा प्रणव शब्द की निरुक्ति की गई है। ‘प्रणव’ शब्द परमात्मा का प्रतीक है। प्रणव (ब्रह्म) सब प्राणों को प्रणाम करवाता है, झुकाता है अथवा अपनी ओर प्रेरित करता है,इसलिए यह ‘प्रणव’ (ब्रह्म) कहलाता है। ‘ओम्’ ही ब्रह्म अर्थात्सब कुछ है। अर्थात् सब ‘ओम्’ यह अक्षर उद्गीथ है इसकी उपासना करनी चाहिए। प्रणव ब्रह्म है, ब्रह्म ही श्रेष्ठ है, इस अक्षर को जानकर जो जिस वस्तु की इच्छा करता है, वह वस्तु उसको प्राप्त होती है।